अबतक इंडिया न्यूज 16 जुलाई देशनोक। अन्नदाता के हक पर सियासत और ढर्रे पर चल रही व्यवस्था का एक बेहद चिंताजनक मामला सामने आया है। देशनोक क्षेत्र के जैसाराम कृषि फीडर से जुड़े किसान पिछले 9 वर्षों से भयंकर वोल्टेज की समस्या से जूझ रहे हैं। सही वोल्टेज न मिलने के कारण फसलें लगातार नष्ट हो रही हैं, जिससे किसानों की माली हालत पूरी तरह दयनीय हो चुकी है।
साल 2017 से काट रहे दफ्तरों के चक्कर
विद्युत विभाग की कार्यप्रणाली का आलम यह है कि पीड़ित किसान साल 2017 से लगातार बिजली विभाग के चक्कर काट रहे हैं। लेकिन आश्वासन के सिवाय उनके हाथ कुछ नहीं लगा। किसानों का आरोप है कि समस्या के समाधान के लिए देशनोक जीएसएस (GSS) से भूमिगत (Underground) लाइन तो बिछा दी गई है, लेकिन अब इसके फाइनल कनेक्शन को लेकर ‘ओछी राजनीति’ शुरू हो गई है।
बड़ा सवाल: जब लाखों रुपये खर्च करके अंडरग्राउंड लाइन बिछा दी गई, तो फिर कनेक्शन जोड़ने में आनाकानी क्यों? किसानों की राह में रोड़े अटका कर आख़िर किसका भला किया जा रहा है?
किसके इशारे पर हो रही ‘किसान विरोधी’ राजनीति?
क्षेत्र में यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि इस पूरे मामले के पीछे कौन है?
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क्या बिजली विभाग के अधिकारी जानबूझकर आंखें मूंदे बैठे हैं?
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क्या ठेकेदार की लापरवाही इसमें शामिल है?
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या फिर किसी रसूखदार के इशारे पर यह ‘किसान विरोधी’ राजनीति खेली जा रही है?
उच्च स्तर तक पहुंचा मामला
पानी अब सिर से ऊपर जा चुका है और किसानों का सब्र टूट रहा है। थक-हारकर अब यह मामला उच्च स्तर (Higher Authorities) तक पहुंचा दिया गया है। किसानों ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द ही देशनोक GSS से इस अंडरग्राउंड लाइन को चालू कर वोल्टेज की समस्या का स्थाई समाधान नहीं किया गया, तो वे उग्र आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।












