अबतक इंडिया न्यूज 13 जून । इस बार की सोमवती अमावस्या ज्येष्ठ अधिकमास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पड़ रही है. इस दिन स्नान और दान के लिए दुर्लभ संयोग बना है, जो पुण्य प्राप्ति का एक बड़ा अवसर है. इस साल की सोमवती अमावस्या पर आप दुर्लभ संयोग में स्नान और दान करके अपने कष्ट, दुख, पाप आदि का निवारण कर सकते हैं, साथ ही ग्रह दोष भी मिटेंगे. आइए जानते हैं कि सोमवती अमावस्या पर क्या दुर्लभ योग बन रहा है? सोमवती अमावस्या पर किन वस्तुओं का दान करना चाहिए?
सोमवती अमावस्या पर दुर्लभ संयोग
- यह दिन स्वयं में पुण्य फलदायी है. इस दिन व्रत रखकर भगवान शिव की पूजा करते हैं और स्नान-दान होता है. इस बार सोमवती अमावस्या के साथ ही मिथुन संक्रांति का दुर्लभ संयोग बना है. सोमवती अमावस्या को सूर्य देव जिस समय वृषभ राशि से निकल कर मिथुन राशि में गोचर करेंगे, उस समय मिथुन संक्रांति होगी.
- इसके अलावा यह सोमवती अमावस्या अधिकमास की है, जो 3 साल में एक बार आती है. इसके अधिपति देव भगवान विष्णु हैं, इस वजह से इसे पुरुषोत्तम मास कहा जाता है. पुरुषोत्तम मास में सोमवती अमावस्या का दिन भगवान शिव और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्ति का अच्छा अवसर है.
- सोमवती अमावस्या के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग और अमृत सिद्धि योग भी बन रहे हैं. ये दोनों ही शुभ योग सुबह में 05:23 ए एम से लेकर शाम 07:08 पी एम तक है. सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए कार्य सफल सिद्ध होंगे. इस समय में किया गया स्नान और दान पुर्ण फलित होगा.
सोमवती अमावस्या 2026 कब है?
पंचांग के अनुसार, इस बार सोमवती अमावस्या अधिक मास के कृष्ण पक्ष में पड़ रही है। अमावस्या तिथि का आरंभ 14 जून, रविवार को दिन में 12 बजकर 20 मिनट पर होगा और अगले दिन 15 जून, सोमवार को सुबह 8 बजकर 24 मिनट तक अमावस्या तिथि व्याप्त रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर 15 जून 2026 को सोमवती अमावस्या का व्रत रखा जाएगा और स्नान-दान किया जाएगा। वहीं, पितृ कार्य के लिए 14 जून का दिन उत्तम रहेगा।
सोमवती अमावस्या पर मिथुन संक्रांति समय
सोमवती अमावस्या के दिन सूर्य देव मिथुन राशि में दोपहर 12 बजकर 59 मिनट पर प्रवेश करेंगे, उस समय मिथुन संक्रांति होगी. मिथुन संक्रांति का महा पुण्य काल दोपहर 12:59 पी एम से 03:19 पी एम तक है, वहीं इसका पुण्य काल दोपहर 12:59 पी एम से शाम 07:20 पी एम तक है.











