अबतक इंडिया न्यूज बीकानेर 11 जून । मातृशक्ति के सम्मान और 33 प्रतिशत आरक्षण का दम भरने वाली सरकार के एक जिम्मेदार मंत्री की संवेदनहीनता गुरुवार को बीकानेर में उस समय खुलकर सामने आ गई, जब वे कलेक्ट्रेट सभागार में पत्रकारों से रूबरू हो रहे थे। प्रदेश के चिकित्सा मंत्री व जिला प्रभारी गजेंद्र सिंह खींवसर ने पीबीएम अस्पताल के आईसीयू में भर्ती 5 गंभीर प्रसूताओं को लेकर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. सुरेंद्र वर्मा से सरेआम पूछ डाला— “बताएं प्रिंसिपल साहब, जिन 5 प्रसूताओं का इलाज चल रहा है, वो नाचते हुए आई थीं या पैदल चलकर?”
प्रभारी मंत्री के इस बड़बोलेपन और संवेदनहीन बयान के बाद सियासी गलियारों में भूचाल आ गया है। विपक्ष ने तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि मानवीय संवेदनाओं की दुहाई देने वाले मंत्री सत्ता के अहंकार में यह भी भूल गए कि गंभीर परिस्थितियों से जूझ रही प्रसूताएं भला कैसे नाचते हुए आ सकती हैं। जब मीडिया ने इस पर सीधे मंत्री से जवाब मांगा, तो वे कन्नी काट गए और सफाई देने के लिए मेडिकल कॉलेज प्राचार्य को आगे कर दिया। मंत्री ने यह भी कहा कि “शुक्र मनाओ कि वे पीबीएम अस्पताल पहुंच गईं, जिससे उनकी जान बच गई।” उनके अनुसार ग्रामीण अंचलों में सही इलाज न मिलने के कारण प्रसूताओं को गंभीर हालत में यहाँ रेफर किया गया था।
चर्चा में रहा प्राचार्य का बयान: ‘मैं रहूं या न रहूं…’
प्रेस वार्ता के दौरान जब मंत्री ने इस पूरे मेडिकल केस पर चिकित्सीय सफाई देने का जिम्मा प्राचार्य पर डाला, तो डॉ. सुरेंद्र वर्मा ने मंत्री के सामने ही दो टूक शब्दों में कहा— “मैं इस पद पर रहूं या न रहूं…”। प्राचार्य के इस बयान की गूंज कलेक्ट्रेट के गलियारों में देर तक सुनाई देती रही। प्रेस वार्ता के बाद जब पत्रकारों ने उनसे इस बयान का भावार्थ पूछा, तो उन्होंने हंसकर बात टाल दी, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में कयासों का दौर शुरू हो गया है।
डॉक्टरों को क्लीन चिट? ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन पर शक की सुई
चिकित्सा मंत्री ने बताया कि जोधपुर से आई 6 डॉक्टरों की टीम ने पीबीएम अस्पताल में अपनी जांच पूरी कर ली है। शुरुआती जांच में अस्पताल प्रशासन या डॉक्टरों की कोई लापरवाही सामने नहीं आई है, जिसे एक तरह से ‘क्लीन चिट’ के रूप में देखा जा रहा है।
कैसे बिगड़ी तबीयत ?
सिजेरियन डिलीवरी (सिजेरियन ऑपरेशन) के बाद प्रसूताओं को बाजार से मंगवाए गए ‘ऑक्सीटोसिन’ इंजेक्शन लगाए गए थे। इसके बाद ही महिलाओं की तबीयत बिगड़ती चली गई। मामले की जांच के लिए ड्रग कंट्रोलर की कमेटी फिलहाल दवाओं के सैंपल की जांच कर रही है, जिसकी रिपोर्ट आना अभी बाकी है।
5 महिलाओं की किडनी फेल, एक की हालत अब भी नाजुक
पीबीएम अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के बाद एक-एक कर 5 महिलाओं की किडनी फेल होने का बेहद गंभीर मामला सामने आया है। हालत इस कदर बिगड़ी कि प्रसूताओं को आईसीयू में शिफ्ट कर कई बार उनकी डायलिसिस करनी पड़ी।
मरीजों की वर्तमान स्थिति:
तबीयत में सुधार: तारा देवी (27), शारदा (26), राहिला (19) और इमरती (20) की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।
स्थिति गंभीर : प्रीति (20) नामक मरीज की हालत अब भी अत्यंत गंभीर बनी हुई है, जिसकी डॉक्टरों द्वारा विशेष मॉनिटरिंग की जा रही है।











