अबतक इंडिया न्यूज 26 मई । बकरीद पर हर साल दुनिया के तमाम मुस्लिम देशों में बड़ी संख्या में भेड़, बकरी, गाय-भैंस, ऊंट आदि जानवरों की कुर्बानी दी जाती है और इस पर खासी बहस भी छिड़ती है. लेकिन इस साल मामला एक कदम आगे है. पश्चिम बंगाल के नए-नवेले सीएम शुभेंदु अधिकारी की सरकार ने 1950 के एक कानून को राज्य में सख्ती से लागू करने के लिए कहा है. चूंकि बकरीद पर्व करीब है, ऐसे में यह मामला खासा चर्चा में है.

इस अधिनियम के तहत पशु वध नियंत्रण अधिनियम को लेकर निर्देश जारी किए हैं. जिससे बिना किसी सरकारी पशु चिकित्सक की अनुमति के गाय या भैंस के मारने पर रोक लगाई गई है. साथ ही किसी गाय या भैंस को तभी मारा जा सकता है, जब उसकी उम्र 14 साल से ज्यादा हो या वह शारीरिक रूप से अक्षम हो. साथ ही पशुओं को खुले में मारने पर भी पाबंदी लगाई गई है.
सऊदी में भी यही नियम
पश्चिम बंगाल की नई सरकार के इस फैसले का कुछ लोगों द्वारा विरोध भी किया जा रहा है. लेकिन यह जानकर आपको आश्चर्य होगा कि मुस्लिमों के सबसे पवित्र तीर्थ मक्का मदीना में भी बकरीद पर गाय की कुर्बानी पर रोक है. सऊदी में स्थित इन दोनों शहर में इस रोक के पीछे इस्लाम से जुड़ा तर्क दिया गया है.

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुसलमानों के प्रमुख पर्व ईद-उल-अजहा पर जानवरों की कुर्बानी को लेकर सऊदी सरकार द्वारा संचालित कार्यक्रम ‘हादी और अदाही’ (Hadi and Adahi) के महाप्रबंधक सेराज मोहम्मद अलफेलाली ने कहा है, “हम हज की अवधि के दौरान गायों और ऊंटों की कुर्बानी नहीं दे रहे हैं.”
पैगंबर इब्राहिम का दिया हवाला
इसे लेकर हवाला दिया गया है कि हजारों साल पहले पैगंबर इब्राहिम (Prophet Abraham) द्वारा शुरू की गई इस रस्म की याद में केवल भेड़ों की ही कुर्बानी दें, जैसा कि तब किया गया था. इसके चलते न केवल गाय-भैंस, बल्कि ऊंट जैसे अन्य बड़े जानवरों की कुर्बानी पर भी रोक है.

वहीं सऊदी अधिकारियों ने 2019 में कोरोना के प्रकोप के बाद से ही बड़े जानवरों की कुर्बानी पर प्रतिबंध लगा दिया था. जिसे बाद में भी नहीं हटाया गया.

बता दें कि बकरीद के मौके पर इस्लाम धर्म के पवित्र तीर्थ मक्का-मदीना में बड़ी संख्या में दुनिया भर से मुसलमान हज करने के लिए आते हैं और यहां सभी धार्मिक रस्मों के साथ-साथ बड़ी तादाद में जानवरों की कुर्बानी भी दी जाती है.






