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शनि अमावस्या पर इस विधि से करें शनिदेव का पूजन, साढ़ेसाती, ढैय्या से मिलती है राहत

अबतक इंडिया न्यूज 16 मई । जिन व्यक्तियों की जन्मकुण्डली में शनि ग्रह अशुभ स्थिति में है अथवा गोचर में जो व्यक्ति शनि की साढ़ेसाती या शनि की ढैय्या से पीड़ित हैं, उन्हें ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या पर शनैश्चर मंत्र का जप करना चाहिए तथा स्तोत्र, शनैश्चर सहस्त्रनामावाली, शनि चालीसा, कवच इत्यादि का पाठ करना चाहिए। शनि गरीबों के प्रतिनिधि हैं, जब शनि अनुकूल होता है, तो व्यक्ति को इस वर्ग के लोगों से सहयोग, समर्थन एवं लाभ प्राप्त होता है। राजनीति में शनि की अनुकूलता किसी भी राजनेता को जनता से वोट दिलाती है। ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या के दिन यह आवश्यक है, कि गरीबों की यथाशक्ति सेवा की जाए।

शनि अनुकूल होने पर व्यक्ति घर, मकान का निर्माण कराता है। शनि की प्रतिकूलता नाना प्रकार के कष्टों का कारण बनती है। ज्येष्ठ कृष्ण अमावस्या को शनि का जन्म होने के कारण इस तिथि को शनि जयन्ती मनाई जाती है। इस दिन शनिदेव के निमित्त जो भी पूजा, पाठ, दान, जप-तप, उपाय किए जाते हैं, उनसे शनि देवता शीघ्र प्रसन्न होते हैं और भक्तों के दुःख तथा कष्टों में कमी करते हुए श्रेष्ठ जीवन-यापन करने की प्रेरणा प्रदान करते हैं।

आज व्रत रखकर शनि देव की पूजा करें और उनको काले गुलाब जामुन और काले तिल के लडडू का भोग लगाएं. शनि चालीसा और शनि स्तोत्र का पाठ करें.  शनि जयंती की कथा सुनें  और आरती करें. साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव है तो छाया दान करें और तेल से शनिदेव का अभिषेक करें. इससे शनिदेव प्रसन्न होंगे और आपकी मनोकामनाएं पूरी होंगी.

पाना हो शनि की पीड़ा से राहत तो इन बातों का रखें विशेष ध्यान

  • शनि को प्रसन्न करने के लिए कभी भी गरीब मजदूरों का हक नहीं मारना चाहिए क्योंकि शनि श्रम का कारक है और नवग्रहों में शनि को सेवक का पद प्राप्त है।
  • शनि को वृद्धावस्था का स्वामी ग्रह माना जाता है। जिस घर में वृद्ध माता-पिता को प्रसन्न रखा जाता है, वहाँ पर शनि की कृपा दृष्टि बनी रहती है। वृद्ध माता-पिता को सताने पर शनि कुपित होता है और शनि शान्ति के सारे उपाय धरे के धरे रह जाते हैं। अतः शनि की पीड़ा दूर करने के लिए सबसे पहले बड़े-बुजुर्गों को प्रसन्न रखना सीखें।
  • शनिवार को गरीब मजदूरों को तेल से बनी चीजें खिलानी चाहिए। आठ किलो तेल की पूड़ियाँ बैंगन की सब्जी के साथ गरीबों को खिलाएँ तो शनि की उग्रता में कमी आती है।
  • शनि दोष और पीड़ा दूर करने के लिए इस शनिवार ज्येष्ठ मास कृष्ण पक्ष की अमावस्या के दिन लोहे से बने बर्तन, उड़द की काली साबुत दाल, काले चने, चमड़े के जूते, काला वस्त्र, सरसों का तेल, कंबल, काले तिल आदि का दान करना लाभकारी रहेगा।
शनि जयंती शुभ योग
शनि जयंती पर सौभाग्य योग, शोभन योग समेत कई शुभ योग बन रहे हैं, जिससे आज के दिन का महत्व बढ़ गया है. साथ आज 300 साल बाद शश महापुरुष योग, गजकेसरी योग, बुद्धादित्य योग, सौभाग्य योग और शोभन योग का दुर्लभ संयोग बन रहा है. इन शुभ योग में शनिदेव की पूजा अर्चना करने से हर सुख की प्राप्ति होती है और शनि दोष, शनि महादशा, शनि साढ़ेसाती व ढैय्या के अशुभ प्रभाव में कमी आती है.
शनि जयंती पूजा विधि 2026
शनि जयंती के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ काले या नीले रंग के वस्त्र धारण करें. इसके बाद शनि मंदिर जाएं या घर के पूजा स्थल पर शनि देव की प्रतिमा स्थापित करें.
  • सरसों के तेल का दीपक जलाएं
  • काला तिल और नीले फूल अर्पित करें
  • शनि मंत्रों का जाप करें
  • पीपल के पेड़ की पूजा करें
  • गरीब और जरूरतमंदों को दान दें
  • धार्मिक मान्यता है कि इस दिन हनुमान चालीसा और शनि स्तोत्र का पाठ करने से भी विशेष लाभ प्राप्त होता है.
शनि मंत्र
ॐ शं शनैश्चराय नमः॥
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार इस मंत्र का 108 बार जाप करने से शनि की साढ़ेसाती व ढैय्या के अशुभ प्रभाव में कमी आती है.

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