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राशन कार्ड पर सरकार की डिजिटल सर्जिकल स्ट्राइक! 3 साल में कटे…

अबतक इंडिया न्यूज 5 मार्च जयपुर । अगर आपके घर में राशन कार्ड है, तो ये खबर सीधे आपकी रसोई से जुड़ी है. सरकारी सस्ता राशन अब सिर्फ जरूरतमंदों तक ही पहुंचेगा, क्योंकि सरकार ने चला दी है डिजिटल छंटनी की बड़ी मुहिम. ई-केवाइसी नहीं करवाई तो नाम सीधा सूची से होगा आउट. प्रदेश में अब तक 26 लाख लोगों के नाम सिर्फ ई-केवाइसी नहीं कराने की वजह से हटा दिए गए हैं, और पिछले तीन साल में कुल 89 लाख से ज्यादा अपात्रों को खाद्य सुरक्षा सूची से बाहर किया गया है.

प्रदेश में खाद्य सुरक्षा योजना के तहत सस्ता राशन पाने वाले परिवारों के लिए सरकार ने ई-केवाइसी को अनिवार्य कर दिया है. डिजिटल सत्यापन की इस सख्ती का असर साफ दिख रहा है अब तक 26 लाख लोगों के नाम केवल ई-केवाइसी नहीं करवाने के कारण सूची से हटा दिए गए हैं. ऐसे लाभार्थियों को फिलहाल सरकारी उचित मूल्य की दुकानों से राशन नहीं मिल सकेगा.

खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की रिपोर्ट के प्रदेश में कुल 89 लाख 01 हजार 039 नाम खाद्य सुरक्षा की पात्रता सूची से हटाए गए. इसी अवधि में 85 लाख 65 हजार 190 नए पात्र व्यक्तियों के नाम जोड़े भी गए हैं. यानी सरकार एक तरफ सूची की सफाई कर रही है, तो दूसरी ओर वास्तविक पात्रों को जोड़ने की प्रक्रिया भी साथ-साथ चल रही है. विभागीय अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई डेटा मिलान, आधार लिंकिंग और फील्ड वेरिफिकेशन के आधार पर की गई है. विभाग का मानना है की चौपहिया वाहन, पक्के मकान, जमीन, आयकरदाता या सरकारी नौकरी वाले परिवार, अब गरीब की श्रेणी में नहीं आएंगे. फर्जीवाड़े पर सर्जिकल स्ट्राइक के लिए गिव अप अभियान भी चलाया गया. हजारों लोगों ने खुद आवेदन देकर नाम हटवाए.

ई-केवाइसी एक डिजिटल सत्यापन प्रक्रिया है, जिसमें राशन कार्ड को आधार से जोड़ा जाता है. राशन कार्ड में शामिल हर सदस्य को बायोमेट्रिक (फिंगरप्रिंट/आंखों की पुतली) से पहचान सत्यापित करनी होती है. सत्यापन नहीं होने पर सिस्टम लाभार्थी को संदिग्ध-अपात्र मान लेता है. उद्देश्य है फर्जी, डुप्लीकेट और मृत लाभार्थियों को हटाकर पात्र परिवारों तक ही उनके हक का गेहूं पहुंचाना. विभाग का तर्क है कि वर्षों से सूची में बड़ी संख्या में ऐसे नाम थे, जो नियमों के मुताबिक अपात्र हैं या जिनकी दोहरी प्रविष्टि थी. ई-केवाइसी के जरिए डेटा की शुद्धि की जा रही है. ऐसे परिवारों को स्वेच्छा से नाम हटाने के लिए गिव अप अभियान भी चलाया जा रहा है. हजारों लोगों ने स्वयं आवेदन देकर सूची से अपना नाम कटवाया है.

गौरतलब हैं की राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम राजस्थान में 2 अक्टूबर 2013 को लागू हुआ. उस समय जल्दबाजी में अपात्रों के नाम भी सूची में जोड़ दिए गए. फिलहाल सरकार ने ई-केवाइसी और अपात्रों को गिव अप अभियान के तहत नाम हटवाने के लिए समय दिया है. इसके बाद वसूली की जाएगी. चेतावनी दी गई है कि जिन अपात्रों ने अब तक गेहूं उठाया है, उनसे 27 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से गेहूं की राशि वसूली जाएगी.

बहरहाल, ई-केवाइसी की सख्ती ने साफ कर दिया है कि ब खाद्य सुरक्षा में सुविधा नहीं, “सत्यापन” चलेगा. सरकार का दावा है कि इससे फर्जीवाड़ा रुकेगा और वास्तविक जरूरतमंदों तक ही सस्ता राशन पहुंचेगा. अब नजर इस पर रहेगी कि गिव अप अभियान और ई-केवाइसी की प्रक्रिया के बाद वास्तव में जरूरतमंदों को कितना लाभ मिलता है और क्या जिनके नाम कटे हैं, उन्हें पुनः अवसर मिलेगा. क्योंकि खाद्य सुरक्षा सिर्फ योजना नहीं, बल्कि गरीब की थाली से जुड़ा संवेदनशील मुद्दा है और इस थाली तक हकदार का हक पहुंचना ही असली परीक्षा है.

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