अबतक इंडिया न्यूज 11 फरवरी । राजस्थान विधानसभा में पेश बजट 2026-27 में पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकाय चुनावों के लिए पात्रता नियमों पर कोई स्पष्ट घोषणा नहीं हुई. उपमुख्यमंत्री एवं वित्त मंत्री दीया कुमारी ने बजट भाषण में विकास, रोजगार, जल सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसे मुद्दों पर फोकस किया, लेकिन दो संतान नियम (two-child norm) या शैक्षणिक योग्यता के संशोधन का जिक्र नहीं किया. इससे पंचायत चुनाव 2026 (संभावित मार्च-अप्रैल) की तैयारियों में असमंजस बना हुआ है।
दो संतान नियम अभी कायम, संशोधन प्रक्रिया जारी
वर्तमान नियम के अनुसार, 27 नवंबर 1995 के बाद तीसरा या उससे अधिक बच्चा होने पर उम्मीदवार सरपंच, प्रधान, जिला परिषद सदस्य, पार्षद या महापौर जैसे पदों पर चुनाव नहीं लड़ सकता. यह प्रावधान राजस्थान पंचायती राज अधिनियम 1994 की धारा 19 और राजस्थान नगरपालिका अधिनियम 2009 की धारा 24 में है. सरकार ने पहले विधानसभा में लिखित जवाब दिया था कि संशोधन की फाइल विधि विभाग में प्रक्रियाधीन है, लेकिन बजट में इसे लागू करने या बिल पेश करने का कोई ऐलान नहीं हुआ. इससे तीन या अधिक संतान वाले हजारों संभावित उम्मीदवारों की स्थिति अनिश्चित बनी हुई है.
शैक्षणिक योग्यता पर भी कोई अपडेट नहीं
पिछले कुछ महीनों में शैक्षणिक योग्यता (जैसे 10वीं/12वीं पास) अनिवार्य करने की चर्चा थी, लेकिन बजट सत्र में इस पर भी कोई घोषणा नहीं हुई. सरकार ने पहले स्पष्ट किया था कि फिलहाल कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है, यानी अनपढ़ या कम पढ़े-लिखे उम्मीदवार भी चुनाव लड़ सकेंगे. विपक्षी दलों ने इसे ग्रामीण राजनीति में भागीदारी सीमित करने का आरोप लगाया था, लेकिन बजट में चुप्पी से मामला और उलझ गया है.
चुनावी तैयारियों पर असर
राज्य निर्वाचन आयोग ने पंचायत चुनाव मार्च में कराने की तैयारी बताई है, लेकिन पात्रता नियमों में बदलाव न होने से उम्मीदवारों में भ्रम है. यदि संशोधन नहीं हुआ तो मौजूदा नियम लागू रहेंगे. सरकार के सूत्रों का कहना है कि अलग से विधेयक या अध्यादेश लाया जा सकता है. प्रदेश भर में सरपंच और अन्य पदों के दावेदार अब आधिकारिक अधिसूचना का इंतजार कर रहे हैं. कुल मिलाकर, बजट सत्र में इन मुद्दों की अनदेखी से पंचायत चुनावों की तैयारियां प्रभावित हो सकती हैं.










