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ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले यात्रियों को ही दुर्घटना बीमा कवर क्यों मिलता है? सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे से मांगा जवाब

अबतक इंडिया न्यूज 21 दिसंबर दिल्ली । सुप्रीम कोर्ट ने रेलवे से सवाल किया है कि दुर्घटना बीमा कवर सिर्फ ऑनलाइन टिकट बुक करने वाले यात्रियों को ही क्यों मिलता है। कोर्ट ने पूछा कि ऑफलाइन टिकट लेने वाले यात्रियों को यह सुविधा क्यों नहीं दी जाती।

अदालत ने कहा कि कोर्ट सलाहकार ने जानकारी दी है कि ऑनलाइन टिकट पर दुर्घटना बीमा मिलता है, जबकि काउंटर से टिकट लेने वालों को यह कवर नहीं दिया जाता। इस पर रेलवे से जवाब मांगा गया है।

बीमा सुविधा में फर्क क्यों?

जस्टिस अहसानुद्दीन अमानुल्लाह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की पीठ ने रेलवे के वकील से कहा है कि वह इस मुद्दे पर निर्देश लेकर अदालत को बताएं। बेंच ने यह भी कहा कि अदालत के सामने यह सवाल है कि एक ही सेवा के लिए यात्रियों के बीच बीमा सुविधा में फर्क क्यों किया जा रहा है।

रेलवे ट्रैक और क्रॉसिंग की सुरक्षा पर ध्यान देने के निर्देश

कोर्ट ने 29 नवंबर को रेलवे को यह भी निर्देश दिया कि वह रेलवे ट्रैक और रेलवे क्रॉसिंग की सुरक्षा पर खास ध्यान दे। अदालत ने कहा कि शुरुआती स्तर पर रेलवे ट्रैक और रेलवे क्रॉसिंग की सुरक्षा पर फोकस होना चाहिए ताकि बाकी सुरक्षा से जुड़े पहलू अपने आप स्पष्ट हो सकें। यह मामला रेलवे सिस्टम में सुरक्षा से जुड़ी अलग-अलग चिंताओं पर सुनवाई के दौरान सामने आया।

CSR में पर्यावरणीय जिम्मेदारी जरूरी: SC

सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा है कि कॉरपोरेट सामाजिक जिम्मेदारी यानी CSR को पर्यावरणीय जिम्मेदारी से अलग नहीं किया जा सकता। अदालत ने साफ कहा कि कम्पनियां अगर पर्यावरण और इकोसिस्टम के दूसरे जीवों की अनदेखी करती हैं तो वे खुद को सामाजिक रूप से जिम्मेदार नहीं कह सकतीं।

जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस ए. एस. चांदुरकर की बेंच ने विलुप्तप्राय प्रजाति गोडावण यानी ग्रेट इंडियन बस्टर्ड के संरक्षण से जुड़े मामले में यह टिप्पणी की। कोर्ट पर्यावरणविद् एम. के. रंजीतसिंह की 2019 की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह पक्षी राजस्थान और गुजरात में गैर-नवीकरणीय ऊर्जा संयंत्रों के कारण खतरे में है। अदालत ने कहा कि ‘सामाजिक जिम्मेदारी’ की कॉरपोरेट परिभाषा में पर्यावरणीय जिम्मेदारी का समावेश होना चाहिए

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