अबतक इंडिया न्यूज देशनोक 26 फरवरी । मां करणी आदर्श विद्या मंदिर देशनोक, के प्रांगण में आज ‘अभिभावक सम्मेलन’ का भव्य आयोजन किया गया। विद्या भारती की गौरवशाली परंपरा के अनुरूप आयोजित इस सम्मेलन में शिक्षाविदों, अभिभावकों ने त्रिकोणीय समन्वय के माध्यम से बालक के सर्वांगीण विकास का संकल्प लिया।
कार्यक्रम का मंगलारंभ अतिथियों द्वारा ज्ञान की अधिष्ठात्री माँ शारदे के सम्मुख दीप प्रज्वलन एवं पावन वंदना के साथ हुआ। समारोह में सहायक प्रधानाचार्य श्रीमती मोनिका खत्री ने उपस्थित अतिथियों का औपचारिक परिचय प्रस्तुत करते हुए उनका आत्मीय अभिनंदन किया।विद्यालय की शैक्षणिक उपलब्धियों,अनुशासनात्मक नवाचारों और सह-शैक्षणिक गतिविधियों की प्रगति रिपोर्ट अभिभावकों के समक्ष रखते हुए विद्यालय के ध्येय पथ की जानकारी साझा की।

समारोह के मुख्य अतिथि नीधि जाडावत ने विद्या भारती के ध्येय एवं कार्यपद्धति पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में विद्यार्थियों के सामने एकाकीपन, मोबाइल का दुरुपयोग और नशे की बढ़ती प्रवृत्ति जैसी गंभीर चुनौतियां हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि आज के युग में भारतीय संस्कृति एवं पर्यावरण रक्षा के लिए विद्या भारती जैसे विद्यालयों का होना नितांत आवश्यक है, जो अन्य विद्यालयों की तुलना में श्रेष्ठ संस्कारों का बीजारोपण कर रहे हैं।
मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित श्रीमान आशीष डागा ने अपने ओजस्वी उद्बोधन में शिक्षक और अभिभावक की भूमिका पर विस्तार से पाथेय प्रदान किया। उन्होंने कहा कि विद्यालय में बच्चा केवल अध्ययन के लिए नहीं आता, बल्कि वह जीवन जीने की कला सीखने आता है। उन्होंने अभिभावकों का आह्वान किया कि वे घर के अतिरिक्त विद्यालय में होने वाली गतिविधियों की भी जानकारी रखें और समय-समय पर आचार्यों से संपर्क कर बच्चे की प्रगति की समीक्षा करें।
कार्यक्रम का मंच संचालन सुश्री गीता सुथार ने किया। कार्यक्रम के अंतिम चरण में प्रबंध समिति के व्यवस्थापक सुमेर सिंह बारहठ ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि बालक का विकास एक त्रिकोणीय प्रक्रिया है जिसमें शिक्षक, अभिभावक और विद्यार्थी का समन्वय आवश्यक है। इस अवसर पर प्रबंध समिति के शांतिलाल बरडिया, मोतीलाल बुच्चा , शिवदयाल उपाध्याय व श्रीमती हेमलता शर्मा और अभिभावक उपस्थित रहे। कल्याण मंत्र के साथ कार्यक्रम का विधिवत समापन हुआ।









