अबतक इंडिया न्यूज 3 अप्रैल । देश में छोटे-छोटे मामलों को लेकर अदालतों में लंबित मामलों की भारी संख्या को कम करने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. संसद में जन विश्वास (संशोधन) विधेयक 2026 पास होने के बाद अब वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने सभी विभागों को लंबित मामलों की समीक्षा करने के निर्देश दिए हैं. सरकार का उद्देश्य न केवल न्यायालयों का बोझ कम करना है, बल्कि आम लोगों और कारोबारियों को राहत देना भी है.
छोटे मामलों में केस वापस लेने की तैयारी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में अपराध गंभीर नहीं हैं, उन्हें वापस लेने पर विचार किया जाएगा. विभागों को सलाह दी गई है कि वे ऐसे मामलों की पहचान करें और अदालत में आवेदन देकर उन्हें बंद करवाएं. इससे न केवल अदालतों में लंबित मामलों की संख्या घटेगी, बल्कि लोगों को लंबे समय से चल रही कानूनी परेशानियों से भी राहत मिलेगी.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि जिन मामलों में अपराध गंभीर नहीं हैं, उन्हें वापस लेने पर विचार किया जाएगा. विभागों को सलाह दी गई है कि वे ऐसे मामलों की पहचान करें और अदालत में आवेदन देकर उन्हें बंद करवाएं. इससे न केवल अदालतों में लंबित मामलों की संख्या घटेगी, बल्कि लोगों को लंबे समय से चल रही कानूनी परेशानियों से भी राहत मिलेगी.
1,000 से ज्यादा प्रावधानों में बदलाव
इस बिल के जरिए 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन किया गया है. करीब 1,000 छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाकर उन्हें जुर्माने या चेतावनी तक सीमित किया गया है. 57 प्रावधानों में जेल की सजा को खत्म किया गया है, जबकि कई मामलों में सजा को कम या जुर्माने में बदला गया है. इससे कानून अधिक सरल और व्यावहारिक बनेंगे.
इस बिल के जरिए 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन किया गया है. करीब 1,000 छोटे अपराधों को अपराध की श्रेणी से हटाकर उन्हें जुर्माने या चेतावनी तक सीमित किया गया है. 57 प्रावधानों में जेल की सजा को खत्म किया गया है, जबकि कई मामलों में सजा को कम या जुर्माने में बदला गया है. इससे कानून अधिक सरल और व्यावहारिक बनेंगे.
अदालतों पर कम होगा भारी बोझ
सरकार के मुताबिक देश में करीब 5 करोड़ मामले छोटे अपराधों से जुड़े हैं, जो शायद अदालत तक पहुंचने ही नहीं चाहिए थे. अब नए प्रावधानों के बाद इन मामलों को बंद करने की प्रक्रिया तेज की जाएगी. इससे न्याय व्यवस्था पर दबाव कम होगा और गंभीर मामलों पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकेगा.
सरकार के मुताबिक देश में करीब 5 करोड़ मामले छोटे अपराधों से जुड़े हैं, जो शायद अदालत तक पहुंचने ही नहीं चाहिए थे. अब नए प्रावधानों के बाद इन मामलों को बंद करने की प्रक्रिया तेज की जाएगी. इससे न्याय व्यवस्था पर दबाव कम होगा और गंभीर मामलों पर ज्यादा ध्यान दिया जा सकेगा.
व्यापार और आम लोगों को मिलेगी राहत
जन विश्वास बिल का मकसद कारोबार को आसान बनाना और लोगों को अनावश्यक परेशानियों से बचाना है. पहले कई छोटे नियमों के उल्लंघन पर भी सख्त कार्रवाई होती थी, जिससे व्यापारियों को दिक्कत होती थी. अब ऐसे मामलों में सिर्फ जुर्माना या चेतावनी दी जाएगी. इससे भ्रष्टाचार और अनावश्यक दबाव भी कम होने की उम्मीद है.
जन विश्वास बिल का मकसद कारोबार को आसान बनाना और लोगों को अनावश्यक परेशानियों से बचाना है. पहले कई छोटे नियमों के उल्लंघन पर भी सख्त कार्रवाई होती थी, जिससे व्यापारियों को दिक्कत होती थी. अब ऐसे मामलों में सिर्फ जुर्माना या चेतावनी दी जाएगी. इससे भ्रष्टाचार और अनावश्यक दबाव भी कम होने की उम्मीद है.
राज्यों को भी अपनाने की सलाह
केंद्र सरकार ने राज्यों से भी अपील की है कि वे अपने कानूनों में इसी तरह के बदलाव करें. अभी तक 12 राज्यों ने अपने स्तर पर ऐसे बिल लागू किए हैं. सरकार का मानना है कि अगर सभी राज्य इस दिशा में कदम उठाते हैं, तो देशभर में कानून व्यवस्था सरल और लोगों के अनुकूल बन सकेगी.
केंद्र सरकार ने राज्यों से भी अपील की है कि वे अपने कानूनों में इसी तरह के बदलाव करें. अभी तक 12 राज्यों ने अपने स्तर पर ऐसे बिल लागू किए हैं. सरकार का मानना है कि अगर सभी राज्य इस दिशा में कदम उठाते हैं, तो देशभर में कानून व्यवस्था सरल और लोगों के अनुकूल बन सकेगी.










