अबतक इंडिया न्यूज 15 मार्च । स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में बिछी मिसाइलों की दहशत के बीच कुछ ऐसा हुआ है, जिसने पूरी दुनिया में भारत का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया है. जब दुनिया के बड़े-बड़े शिपिंग दिग्गज खाड़ी देशों के रास्तों से गुजरने में कतरा रहे हैं, तब भारतीय ध्वज वाला विशालकाय कच्चा तेल टैंकर ‘जग लाड़की’ UAE के फुजैराह पोर्ट से सुरक्षित बाहर निकल आया है. यह केवल एक जहाज की रवानगी नहीं है, बल्कि सुलगते समुद्र में भारत की डिप्लोमेसी की एक बड़ी जीत है.
पश्चिम एशिया में तनाव उस चरम पर है जहां हर बीतता मिनट एक नए हमले की खबर लेकर आता है. हाल ही में फुजैराह तेल टर्मिनल पर हुए हमले ने वैश्विक तेल बाजार में हड़कंप मचा दिया था. दहशत ऐसी थी कि कई देशों के जहाजों ने अपने रूट बदल लिए, लेकिन भारतीय टैंकर ‘जग लाड़की’ ने न केवल अपनी जिम्मेदारी निभाई, बल्कि संकट के बीच से रास्ता बनाकर निकला. लगभग 80,800 टन ‘मुरबन क्रूड ऑयल’ से लदा यह टैंकर भारतीय समयानुसार सुबह 10:30 बजे फुजैराह से रवाना हुआ. भारत सरकार ने पुष्टि की है कि जहाज पर सवार सभी चालक दल के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं और जहाज अब सीधे भारत की ओर बढ़ रहा है.
क्यों अहम है ‘होर्मुज’ का यह रास्ता?
अगर आप नक्शे पर देखें, तो फुजैराह पोर्ट होर्मुज के बेहद करीब है. दुनिया के कुल कच्चे तेल के व्यापार का लगभग 20% से 30% हिस्सा इसी संकरे समुद्री रास्ते से होकर गुजरता है. इसे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा की धमनी कहा जाता है. फिलहाल यह पूरा इलाका एक वॉर जोन में तब्दील हो चुका है. यहां एक छोटी सी चूक वैश्विक तेल कीमतों में आग लगा सकती है.
‘जग लाड़की’ का सुरक्षित निकलना इसलिए भी खास है क्योंकि यह पिछले कुछ दिनों में संघर्ष क्षेत्र से बिना किसी नुकसान के निकलने वाला चौथा भारतीय जहाज है. यह दिखाता है कि युद्ध के माहौल में भी भारतीय झंडे की अपनी एक साख और सुरक्षा कवच है.
साइलेंट डिप्लोमेसी का नतीजा
यह सफलता महज इत्तेफाक नहीं है. इसके पीछे भारत की वह साइलेंट डिप्लोमेसी और भारतीय नौसेना की वह चौकस निगाहें हैं, जो खाड़ी देशों में पल-पल की खबर रख रही हैं. भारत सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि वह पश्चिम एशिया की स्थिति पर बारीकी से नजर रखे हुए है. सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारतीय जहाजों का सुरक्षित निकलना हमारी समुद्री सुरक्षा रणनीति की सफलता है. हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि देश में ईंधन की आपूर्ति स्थिर रहे और हमारे नाविक सुरक्षित रहें.
जब लाल सागर और होर्मुज के आसपास जहाजों को ड्रोन और मिसाइलों से निशाना बनाया जा रहा है, तब भारतीय जहाजों का निरंतर सुरक्षित आवागमन भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ और सामरिक पैठ को दर्शाता है. यह दुनिया को संदेश है कि भारत न केवल अपनी ऊर्जा जरूरतों को सुरक्षित करना जानता है, बल्कि संकट की घड़ी में भी उसके जहाज डगमगाते नहीं हैं.
एनर्जी सिक्योरिटी की बड़ी जीत
भारत अपनी जरूरत का करीब 85% कच्चा तेल आयात करता है. होर्मुज जलडमरूमध्य में जरा सी भी रुकावट भारत की अर्थव्यवस्था के लिए ‘शॉक’ की तरह होती है. ऐसे में 80 हजार टन से ज्यादा कच्चा तेल लेकर आ रहा ‘जग लाड़की’ भारत के लिए किसी अनमोल खजाने से कम नहीं है. यह कार्गो उन आशंकाओं को खत्म करता है कि युद्ध की वजह से भारत में तेल की किल्लत हो सकती है.









