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हाथ में संविधान, जमीन पर गन… छत्तीसगढ़ में हुआ देश का सबसे बड़ा नक्सलियों का आत्मसमर्पण

अबतक इंडिया न्यूज 17 अक्टूबर । देश में लाल आतंक के मामले में शुक्रवार का दिन ऐतिहासिक रहा। जब छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और दोनों उप-मुख्यमंत्री विजय शर्मा और अरुण साव के सामने 210 नक्सलियों (111 महिला और 99 पुरुष) ने हाथों में संविधान की कॉपी लिए हथियार डाल दिए। यह सब समाज की मुख्यधारा में वापस आना चाहते हैं। नौ करोड़ रुपए से अधिक के इनामी इन नक्सलियों में 27 टॉप कैडर्स हैं।

210 नक्सलियों ने किया सरेंडर

छत्तीसगढ़ बस्तर रेंज के आईजी पी सुंदरराज ने मीडिया  को बताया कि आत्मसमर्पण करने वाले टॉप कैडर नक्सलियों में सेंट्रल कमिटी मेंबर (CCM) रूपेश उर्फ सतीश, दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमिटी (DKSZC) से भास्कर उर्फ राजमन मांडवी, रनीता शामिल हैं। इनके अलावा राजू सलाम और धन्नू वेत्ती उर्फ संतू समेत एक रीजनल कमिटी मेंबर (RCM), 22 डिविजनल कमिटी मेंबर (DVCM), 61 एरिया कमिटी मेंबर (ACM) और 98 पार्टी सदस्य समेत 22 अन्य कैडर मेंबर शामिल हैं। इन सभी ने हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में आने के मकसद से हथियार डाले। देश के इतिहास में नक्सलियों का यह सबसे बड़ा सरेंडर हुआ है।

सीएम- डिप्टी सीएम समेत अधिकारी रहे मौजूद

अधिकारियों का यह भी कहना है कि नक्सलियों के कुछ और कैडर उनके संपर्क में है। उम्मीद है कि आने वाले कुछ दिनों में और भी नक्सली हथियार डालेंगे। सूत्रों का यह भी कहना है कि केवल छत्तीसगढ़ में ही नहीं बल्कि महाराष्ट्र समेत अन्य राज्यों से भी कुछ नक्सली हथियार डाल सकते हैं। भूपति के आत्मसमर्पण करने के बाद से टॉप नक्सली लगातार सरेंडर करने की तरफ बढ़ रहे हैं।

सरेंडर के बीच नक्सलियों में बढ़ रहा मतभेद

हालांकि, सूत्रों का कहना है कि 15 अक्टूबर को महाराष्ट्र के गढ़चिरौली में अपने 60 साथियों के आत्मसमर्पण करने वाले टॉप नक्सली नेता मल्लोजुला वेणुगोपाल राव उर्फ भूपति उर्फ सोनू ने अधिकारियों को बताया है कि आंदोलन में मतभेद बढ़ गए हैं। कुछ लोग आत्मसमर्पण करना चाहते हैं, कुछ नहीं। इसमें अब दो गुट उभरे हैं। एक सोनू, सतीश और राजमन मंडावी वाला जो शांति के पक्ष में हैं।

वहीं दूसरा देवजी, हिडमा और प्रभाकर वाला जो सरकार के सामने हथियार डालने के पक्ष में नहीं हैं। शुक्रवार को छत्तीसगढ़ में सरेंडर करने वाले 210 नक्सलियों ने 153 हथियार भी सरकार के सामने सरेंडर किए। इनमें 19 एके-47, 17 एसएलआर, 23 इंसास, एक एलएमजी, 36 थ्री नोट थ्री राइफल, 11 बीजीएल लॉन्चर, चार कार्बाइन और अन्य हथियार शामिल हैं।

सरकार देगी हर योजना का लाभ

डिप्टी सीएम विजय शर्मा ने कहा, सभी 210 नक्सलियों को तिरंगे की छांव में पुनर्वास योजना के तहत तात्कालिक सहायता राशि और रोजगार के अवसर दिए जाएंगे. इनमें से कई लोग स्किल ट्रेनिंग, कृषि परियोजनाओं और सामुदायिक विकास कार्यों में भाग लेंगे. उन्होंने बताया कि अब माड़ और उत्तर-पश्चिम जोन लगभग नक्सल-मुक्त हो चुके हैं. कंपनी नंबर-10 और 5 के कुछ सदस्य ही बाकि हैं, जिन पर जल्द कार्रवाई होगी.

लाल आतंक से हरियाली की ओर

कभी गोलियों की आवाज से गूंजता यह इलाका आज ताली और जयकारों से भर उठा. जगदलपुर के पुलिस लाइन ग्राउंड में खड़े वे लोग जिन्होंने बरसों सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था. आज उसी सरकार के साथ खड़े दिखाए दिए. कंधों से उतरी बंदूकें शायद अब खेतों में हल बनेंगी, और उंगलियां ट्रिगर नहीं, कलम थामेंगी.

खास बात यह है कि जिस जगह ये नक्सली पुलिस को हथियार देकर मुख्य धारा से जुड़े, इसी जगह पर आज से 15 साल पहले 6 अप्रैल 2010 को सुकमा के ताड़मेटला में हुए नक्सली हमले में शहीद सीआरपीएफ के 76 जवानों को अंतिम सलामी दी गई थी.

इस बड़े नक्सली वारदात के मास्टरमाइंड रहे सीसी मेंबर रूपेश उर्फ सतीश, राजू सलाम, भास्कर और रानीता ने अपने हथियार पुलिस के सामने रखकर लाल आंतक को अलविदा कह दिया. जिससे शहीद जवानों को सच्ची श्रद्धांजलि मिली.

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