अबतक इंडिया न्यूज 28 नवंबर । कर्नाटक में शीर्ष पद के लिए सत्तारुढ़ कांग्रेस में अंदरुनी विवाद खुलकर सामने आ गया है. सिद्धारमैया मुख्यमंत्री पद छोड़ने को तैयार नहीं दिख रहे हैं तो उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने भी अब अपने तेवर ढीले नहीं किए हैं. ढाई-ढाई साल के सीएम वाले फॉर्मूले को लेकर कांग्रेस में लंबे समय से विवाद चल रहा है, लेकिन पार्टी आलाकमान इस समस्या को अब तक सुलझा नहीं सकी है. यहां का जातीय समीकरण भी ऐसा है कि आलाकमान के लिए कोई भी फैसला लेना आसान नहीं होगा.
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे की ओर से दिल्ली में कर्नाटक के विवाद को सुलझाने की बात कही जा रही है. इस बीच इस दक्षिणी राज्य में जातीय गुट भी अपने-अपने नेता को लेकर अलर्ट हो गए हैं. स्थिति यह हो गई कि एक जातीय गुट ने मौजूदा मुख्यमंत्री को हटाने के खिलाफ चेतावनी दी तो दूसरे गुट ने शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाए जाने का समर्थन कर पार्टी में टेंशन में डाल दिया.
‘DK के साथ अन्याय हुआ तो विरोध करेंगे’
सिद्धारमैया और शिवकुमार गुट जहां एक ओर खुलकर सामने आ गए हैं तो वहीं कर्नाटक राज्य पिछड़ा वर्ग समुदाय महासंघ (KSFBCC) ने कांग्रेस को चेतावनी दी है कि अगर सिद्धारमैया को सीएम पद से हटाया गया तो यह सही नहीं होगा और पार्टी पर असर पड़ेगा. वहीं कर्नाटक राज्य वोक्कालिगारा संघ का कहना है कि शिवकुमार के साथ अगर अन्याय हुआ तो कड़ा विरोध किया जाएगा.
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को ताकतवर अहिंदा का समर्थन हासिल है. अहिंदा (AHINDA)- अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलित समुदायों के लिए संक्षिप्त कन्नड़ नाम है और इसे सिद्धरमैया का वोटबैंक माना जाता है, जबकि कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष और उपमुख्यमंत्री शिवकुमार वोक्कालिगा समुदाय से आते हैं. वोक्कालिगा भी राज्य में राजनीतिक रूप से पावरफुल है और यह कृषक समुदाय से जुड़ा हुआ है. वोक्कालिगा की स्थिति का आकलन ऐसे लगाया जा सकता है, कि इस बिरादरी से आने वाले कई नेता मुख्यमंत्री बन चुके हैं. यहां तक एक नेता प्रधानमंत्री भी बनने में कामयाब रहे.
वोक्कालिगा से जुड़े कई नेता बने PM-CM
मुख्यमंत्री बनने वालों में के हनुमंतैया, केसी रेड्डी, एचडी देवगौड़ा, एसएम कृष्णा, सदानंद गौड़ा और एचडी कुमारस्वामी के नाम प्रमुख हैं. देवगौड़ा देश के प्रधानमंत्री भी बने.
वोक्कालिगा संघ चाहता है कि शिवकुमार को मुख्यमंत्री बनाया. संघ के अध्यक्ष श्रीनिवास का कहना है कि शिवकुमार ने विधानसभा चुनाव के दौरान कड़ी मेहनत की थी, उन्होंने पूरे राज्य दौरा किया, संगठन को मजबूत बनाने का काम किया. उन्हीं की वजहों से कांग्रेस को 2023 के चुनाव में 140 सीटों पर जीत मिली थी.
‘सिद्धारमैया को हटाया तो बर्दाश्त नहीं करेंगे’
इसी तरह केएसएफबीसीसी ने सिद्धारमैया का समर्थन कर आलाकमान को टेंशन में डाल दिया है. केएसएफबीसीसी के अध्यक्ष केएम रामचंद्रप्पा ने कहा कि अहिंदा इस घटनाक्रम से काफी दुखी है. उनका कहना है कि दलित समुदाय किसी के आगे नहीं झुकेगा. अगर धर्मगुरु और वोक्कालिगा संघ आंदोलन करता है तो हम भी अपने नेता को नहीं छोड़ेंगे. अहिंदा समुदाय की 70 फीसदी आबादी ने सिद्धारमैया सरकार का समर्थन कर रही है. अहिंदा समुदाय के किसी नेता को गिराने की कोशिश की गई तो हम यह बर्दाश्त नहीं करेंगे.
जानने की कोशिश करते हैं कि कर्नाटक में जारी पावर गेम में कौन किस पर कितना भारी है. शीर्ष नेतृत्व को लेकर अंदरुनी कलह तेज होने के इतर अहिंदा ने एक रिपोर्ट बनाई है. इस कवायद का मकसद पार्टी में यह संदेश देना है कि अगर सिद्धारमैया को मुख्यमंत्री पद से हटाया जाता है, तो अहिंदा अपना समर्थन वापस भी ले सकता है.
कैसा है कर्नाटक में जातीय समीकरण
अहिंदा की तैयार रिपोर्ट के मुताबिक, राज्य के 224 सीटों वाली विधानसभा में 19 विधानसभा क्षेत्रों में करीब 80% वोटर अहिंदा गुट से जुड़े हुए हैं. जबकि 42 चुनाव क्षेत्रों में, 80% अहिंदा वोटर निर्णायक भूमिका में हैं. इसी तरह 83 से ज्यादा चुनाव क्षेत्रों में, 70% वोटर अहिंदा बिरादरी से जुड़े लोग हैं.
इसके अलावा 49 चुनाव क्षेत्रों में 60 फीसदी से ज्यादा, 22 चुनाव क्षेत्रों में 50% से ज्यादा वोटर और 5 चुनाव क्षेत्रों में, 90% से ज्यादा वोटर माइनॉरिटी, पिछड़े वर्ग और दलित हैं. इस रिपोर्ट के जरिए इस गुट की कोशिश है कि वे आलाकमान को यह बताना चाहते हैं राज्य के अल्पसंख्यक, पिछड़े वर्ग और दलित वोट बैंक सिद्धारमैया के साथ है.
फिलहाल दिल्ली में कर्नाटक विवाद को सुलझाने की कोशिश की जा रही है. विवाद को खत्म करने को लेकर कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने कहा कि वह इस मामले को सुलझाने के लिए राहुल गांधी और सिद्धारमैया तथा शिवकुमार सहित चुनिंदा नेताओं के साथ बैठक करेंगे. अंदरुनी कलह में कर्नाटक के कई जातीय गुट भी उतर आए हैं और जिस तरह का लगातार विवाद बना हुआ है वो आलाकमान के लिए सुलझा पाना आसान नजर नहीं आ रहा.











