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अमर कला महोत्सव परवान पर: दूसरे दिन हुए विभिन्न कार्यक्रम

अबतक इंडिया न्यूज बीकानेर, 30 मार्च। कला एवं संस्कृति विभाग, राजस्थान तथा पश्चिम क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, उदयपुर, विरासत संवर्धन संस्थान के सहयोग से कल्पना संगीत एवं थिएटर संस्थान द्वारा प्रख्यात संगीतकार स्व. अमरचंद पुरोहित की स्मृति में तीन दिवसीय अमर कला महोत्सव 2026 के तीसरे संस्करण के दूसरे दिन सोमवार को स्थानीय टी.एम. ऑडिटोरियम, गंगाशहर, बीकानेर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित हुए।

प्रथम सत्र में प्रशिक्षणार्थियों को मोबाइल व डीएसएलआर कैमरा बेसिक फोटोग्राफी वर्कशॉप में उदयपुर से आए मुख्य प्रशिक्षक वरिष्ठ फोटो पत्रकार राकेश शर्मा राजदीप एवं जयपुर से आए सहयोगी साथी अजय पारीख ने प्रतिभागियों को फोटोग्राफी के मूल सिद्धांत-कैमरा, उसकी कार्यप्रणाली और विभिन्न प्रकार के कैमरों (मोबाइल व डीएसएलआर) का परिचय दिया। साथ ही प्रतिभागियों को एक्सपोजर ट्रायंगल (अपर्चर, शटर स्पीड, आईएसओ) की सरल भाषा में जानकारी तथा मोबाइल कैमरा सेटिंग्स और डीएसएलआर के बेसिक बटन व मोड्स (ऑटो, मैनुअल) को समझाया। दिन के अंत में छोटे-छोटे प्रैक्टिकल अभ्यास भी कराए। कम्पोजिशन और प्रैक्टिकल फोटोग्राफी सत्र में मॉडल शूट (रजनी सारस्वत) संग कराया गया। इस दौरान प्रतिभागियों को अच्छी फोटो लेने के लिए आवश्यक कम्पोजिशन तकनीकें जैसे रूल ऑफ थर्ड्स, लीडिंग लाइन्स, फ्रेमिंग, लाइटिंग का सही उपयोग आदि के बारे में बताया। इसी प्रकार कार्यशाला के अंतिम दिवस 31 मार्च को सुबह के सत्र में स्ट्रीट फोटोग्राफी कराई जाएगी। इसके बाद एडिटिंग, प्रेजेंटेशन और मूल्यांकन के तहत अंतिम दिन प्रतिभागियों को अपनी खींची गई तस्वीरों को एडिट कर बेहतर बनाने का अभ्यास कराया जाएगा। इसके बाद फोटो प्रेजेंटेशन और समीक्षा सत्र आयोजित होगा, जिसमें विशेषज्ञ द्वारा फीडबैक दिया जाएगा। अंत में प्रमाण पत्र वितरण और समापन समारोह के साथ वर्कशॉप का समापन किया जाएगा।

दूसरे सत्र में मास्टर तेजस जोशी का तबला वादन हुआ। बीकानेर के विख्यात संगीतज्ञ पण्डित शिवनारायण जोशी परिवार के तेजस ने तीन ताल में कायदा पेश कर और कुछ पारंगत लग्गी लड़ी बेस्ड बनारस की लग्गी लड़ी तोड़े, उसके प्रकार बजाई। हारमोनियम पर संगत कृष्ण कुमार जोशी ने दी।

इसके पश्चात् श्री जैन पब्लिक स्कूल, बीकानेर के थियेटर संकाय के विद्यार्थियों द्वारा विजय शर्मा द्वारा लिखित व भरतसिंह राजपुरोहित द्वारा निर्देशित नाटक “अग्निपुत्री“ का मंचन किया गया। मिसाइल मिशन पर आधारित इस नाटक के बाल अभिनेताओं मे हर्षिता सेठिया, न्यासा बाठियॉं, कुसुम मूंड, ,प्रियल श्रीमाली, भुवेश पुरोहित, ममता व्यास, दिव्यांश भूरा, सक्षम शर्मा और सुहानी पुरोहित ने अभिनय किया। मेकअप और कोस्टम पीहू ठाकुर का था। नाटक “अग्निपुत्री” विज्ञान में महिला विषय पर आधारित एक प्रेरणादायक नाटक है। यह भारत की प्रसिद्ध महिला वैज्ञानिक, मिसाइल व महिला वैमानिकी विशेषज्ञ डॉ. टेसी थॉमस के जीवन से प्रेरित है। इस नाटक का उद्देश्य लड़कियों में विज्ञान के प्रति रुचि बढ़ाना, उन्हें अनुसंधान और खोज के क्षेत्र में जागरूक व प्रेरित करना है। इस विज्ञान पर आधारित नाटक अग्निपुत्री में “टेसी” नाम की एक लड़की की संघर्षपूर्ण यात्रा को दर्शाया गया है, जो एक छोटे से गाँव के किसान परिवार में जन्म लेने के बावजूद डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम को अपना आदर्श मानकर वैज्ञानिक बनने का सपना देखती है। वह अपने दृढ़ संकल्प और मेहनत के बल पर डीआरडीओ में वैज्ञानिक बनकर भारत के लिए मिसाइल तैयार करती है। इसमें एक लड़की के संघर्ष को भारतीय समाज की पारंपरिक सोच के विरुद्ध, लिंग भेद, लड़कियों के प्रति विज्ञान के क्षेत्र में उदासीन दृष्टिकोण, और पुरुषप्रधान मानसिकता के विरुद्ध सकारात्मक परिवर्तन के रूप में दिखाया गया है।

सायं 4ः30 बजे जोधपुर के बुंदू खाँ लंगा पार्टी द्वारा लोक गीतों की प्रस्तुतियां दी गई जिसमें आलीजा म्हारो गोरबंद नखरालो, आवो नी बालम पधारो म्हारे देश, आवै हिचकी रे म्हने आवै हिचकी, निम्बूड़ा निम्बूड़ा, मोरचंग और कव्वाली की प्रस्तुति दी। इनकी प्रस्तुति ने सभागार में बैठे सभी दर्शकों को अपनी सीट से उठकर नृत्य करने पर मजबूर कर दिया।

तीसरे एवं अंतिम सत्र में गूंज कला एवं संस्कृति संस्थान द्वारा के नाट्य दल द्वारा  विजय शर्मा द्वारा लिखित एवं अनोप सिंह द्वारा निर्देशित नाटक ‘‘टैडी और हम’’ का मंचन किया गया। भागम भाग भरी जिंदगी में जहां पति पत्नी दोनों नौकरी करते हैं वहां गलतफहमी की वजह से उनमें शक उत्पन्न हो जाता है और अपने अहम के कारण वैवाहिक जीवन में सामंजस्य नहीं बिठा पाने के कारण उत्पन्न हुई स्थिति में उनकी बच्ची अवसाद में आ जाती है। संवादहीनता की स्थिति में टेडी बीयर जिसका नाम ‘‘पीलू’’ है उससे संवाद करके वह बच्ची अपनी मानसिक स्थिति को सही करने का प्रयास करती है। लेकिन बच्ची की अवसाद भरी बातें सुनने पर पति-पत्नी को अपनी भूल का एहसास होता है और फिर एक दूसरे की भावना का सम्मान करने लगते हैं और एक बार इन तीनों की जिंदगी पुनः खुशहाल हो जाती है। मंच पर शैलेंद्र सिंह भाटी, महिका महर्षि, ममता व्यास, राकेश सैनी, रोहित वाल्मीकि, उत्तम सिंह थे। प्रकाश प्रभाव विजय सिंह राठौड़ का, रूप सज्जा ज्योत्सना व्यास, मंच सज्जा सीमा व्यास, संगीत भरत सिंह एवं प्रदर्शन प्रभारी रामसहाय हर्ष रहे।

समारोह के अंतिम दिवस पर अंतराष्ट्रीय सुमेरू भजन गायक जितेन्द्र सारस्वत अपने भजनों की प्रस्तुति देंगे। इसके पश्चात् दोपहर 3 बजे अमर काव्य धारा के अन्तर्गत रचनाकार हरिशंकर आचार्य, कृष्णा आचार्य, मोनिका गौड़, बाबूलाल छंगाणी, मनीषा आर्य सोनी, ईरशाद अजीज, बुनियाद हुसैन जहीन, हरीश बी शर्मा, आनंद पुरोहित “मस्ताना”, विप्लव व्यास व संजय पुरोहित अपनी रचनाऐं वरिष्ठ साहित्यकार मालचंद तिवाड़ी व कमल किशोर रंगा के सानिध्य में करेंगे। सांय 7ः30 बजे रसधारा सांस्कृतिक संस्थान भीलवाड़ा की ओर से अनुराग सिंह राठौड़ के निर्देशन व गोपाल आचार्य के मार्गदर्शन में राजस्थानी नाटक कठपुतलियाँ का मंचन किया जाएगा।

मुख्य अतिथि अर्जुनदेव चारण ने विभिन्न कार्यशालाओं का अवलोकन किया। जयपुर से आये गगन मिश्रा, जोधपुर से आये अरू व्यास एवं भीलवाड़ा से आये गोपाल आचार्य को मोमेण्टो प्रदान किया गया।

समापन अवसर पर वरिष्ठ रंगकर्मी प्रदीप भटनागर महेन्द्र स्वामी, प्रियंका पुरोहित, भारत प्रकाश श्रीमाली, तरुण गॉड, राजभारती शर्मा, सीताराम कच्छावा, डॉक्टर सरिता स्वामी, जितेंद्र पारीक, निशा संध्या संतोष आदि उपस्थित रहे।

मंच संचालन नवल किशोर व्यास, आरजे मयूर एवं मयंक सोनी ने किया।

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