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18 दिन बाद साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का खुल गया राज !

अबतक इंडिया न्यूज 14 फरवरी । साध्वी प्रेम बाईसा की मौत का शनिवार को राज खुल गया है. साध्वी के मौत के 18 दिन बाद पुलिस कमिश्नर ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रेम बाईसा की आश्रम में तबीयत खराब हुई, इस दौरान उन्हें सांस लेने में परेशानी हो रही थी. पिता विरमनाथ के बुलाने पर आए कंपाउंडर देवी सिंह ने प्रेम बाईसा को दो इंजेक्शन लगाए और प्रेम बाईसा की तबीयत और ज्यादा खराब हो गई. अस्पताल ले जाने पर साध्वी को मृत घोषित कर दिया गया है. एसआईआटी ने साध्वी की मौत की जांच के लिए 46 लोगों से पूछताछ की थी और दर्जनों सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए.

साध्वी को थी अस्थमा की बीमारी

विसरा रिपोर्ट आने के बाद मेडिकल बोर्ड ने अपनी विस्तृत पोस्टमार्टम रिपोर्ट दे दी, जिसमें पता चला कि साध्वी की मौत मौत कार्डियक अरेस्ट और सांस क़ी बीमारी से होने हुई. पुलिस कमिश्रर ने कंपाउंडर देवी सिंह पर लापरवाही की आरोप लगाते हुए कहा कि साध्वी को पहले से अस्थमा होने और सांस क़ी बीमारी थी. मेडिकल अधिनियम और निर्धारित कानूनी प्रावधान के तहत क़ी कार्रवाई की जाएगी. प्रेम बाईसा को जब सांस लेने में तकलीफ हो रही थी तो उनके पिता वीरमनाथ ने कंपाउंडर देवी सिंह को बुलाकर दो इंजेक्शन लगाए. जिसके बाद प्रेम बाईसा की तबीयत ज्यादा खराब हो गई.

साध्वी की तबीयत क्या इंजेक्शन लगाने से ज्यादा खराब हुई, यह फिलहाल जाच का विषय है, लेकिन पुलिस अब इस मामले में यह भी जांच कर रही है कि देवी सिंह इंजेक्शन लगाने के लिए ऑथराइज था या नहीं. सबसे बड़ी बात है कि कंपाउंडर ने बिना की किसी डॉक्टर के पर्ची के साध्वी को इंजेक्शन लगाया, जो एक बड़ी लापरवाही सामने आई. पुलिस कमिश्नर ने बताया कि कानून के हिसाब से कार्रवाई की जाएगी.

प्रेम बाईसा की आखिरी पोस्ट पर क्या बोली पुलिस

वहीं प्रेम बाईसा की मौत के बाद डाली गई सोशल मीडिया पोस्ट को लेकर पुलिस कमिश्नर ओम प्रकाश ने बताया कि यह पोस्ट वीरमनाथ के कहने पर डाली गई और इस पोस्ट के डालने के पीछे कोई दुर्भावनापूर्ण इरादे नहीं था. बता दें कि साध्वी प्रेम बाईसा के आखिरी इंस्टाग्राम पोस्ट में लिखा गया था कि मेरे जीवन में आदि जगतगुरु शंकराचार्य भगवान, विश्व योग गुरुओं व पूज्य संत महात्माओं का हर पल आशीर्वाद रहा मैंने आदि गुरू शंकराचार्य और देश के कई महान संत महात्माओं को लिखित पत्र लिखा. अग्नि परीक्षा के लिए निवेदन किया, लेकिन प्रकृति को क्या मंजूर था? मैं इस दुनिया से हमेशा के लिए अलविदा लेकिन ईश्वर और पूज्य संत महात्माओं पर पूर्ण भरोसा है, मेरे जीते जी नहीं तो जाने के बाद तो न्याय मिलेगा.

 

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