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जल जीवन मिशन घोटाले में ACB का बड़ा एक्शन, रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल समेत 15 ठिकानों पर रेड, 9 हिरासत में

अबतक इंडिया न्यूज 17 फरवरी जयपुर । राजस्थान के बहुचर्चित ‘जल जीवन मिशन’ (JJM) घोटाले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने मंगलवार सुबह प्रदेशव्यापी स्ट्राइक की है. DIG रामेश्वर सिंह के नेतृत्व में गठित SIT टीम ने भ्रष्टाचार की जड़ों को खोदने के लिए एक साथ जयपुर, दिल्ली, बाड़मेर, सीकर, जालौर सहित बिहार और झारखंड के 15 से अधिक ठिकानों पर धावा बोला है.

रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल के ठिकानों पर हलचल

इस कार्रवाई का सबसे बड़ा केंद्र पूर्व अतिरिक्त मुख्य सचिव (ACS) और रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल के संभावित ठिकाने रहे हैं. माना जा रहा है कि मिशन के दौरान हुए करोड़ों के फर्जीवाड़े की कड़ियां सीधे उच्च प्रशासनिक स्तर से जुड़ी हुई हैं. सुबह की पहली किरण के साथ ही ACB की अलग-अलग टीमों ने संदिग्धों के आवास और कार्यालयों को घेरे में ले लिया.

9 लोग हिरासत में, पूछताछ का दौर जारी

सिर्फ छापेमारी ही नहीं, बल्कि ACB ने इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुए कई रसूखदारों को हिरासत में लिया है. सूत्रों के मुताबिक, भ्रष्टाचार के इस जाल में शामिल अधिकारियों और ठेकेदारों से गहन पूछताछ की जा रही है. हिरासत में लिए गए लोगों के नाम केडी गुप्ता, सुशील शर्मा, डीके गौड़, महेंद्र सोनी, विशाल सक्सेना, दिनेश गोयल, शुभांशु दीक्षित, अरुण श्रीवास्तव और निरिल कुमार हैं. इन सभी से अज्ञात स्थानों पर पूछताछ की जा रही है, जिससे बड़े खुलासे होने की उम्मीद है.

पहले इन अधिकारियों पर दर्ज हुई थी FIR

इससे पहले ACB ने फर्जी दस्तावेजों के जरिए करोड़ों के ठेके बांटने के मामले में पीएचईडी (PHED) के तीन अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज की थी. अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने नियमों को ताक पर रखकर चहेती कंपनियों को फायदा पहुंचाया और सरकार की तिजोरी में सेंध लगाई. एसीबी ने जांच रिपोर्ट के आधार पर जिन बड़े चेहरों को नामजद किया है, उनमें तत्कालीन मुख्य अभियंता (विशेष परियोजना) दिनेश गोयल, तत्कालीन अधीक्षण अभियंता (अजमेर), जो अब सेवानिवृत्त हो चुके हैं महेंद्र प्रकाश सोनी और अधिशासी अभियंता (परियोजना खंड, मांडल, भीलवाड़ा) सिद्धार्थ टांक शामिल हैं.

क्या है जल जीवन मिशन घोटाला?

जल जीवन मिशन घोटाला राजस्थान का एक बड़ा भ्रष्टाचार मामला है, जिसमें ‘हर घर जल’ योजना के तहत ग्रामीण इलाकों में नल कनेक्शन देने के नाम पर 900 करोड़ रुपये से ज्यादा की हेराफेरी की गई. इस घोटाले में ठेकेदारों ने PHED विभाग के अधिकारियों के साथ मिलीभगत कर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र  के आधार पर बड़े टेंडर हासिल किए और घटिया क्वालिटी के पाइपों का इस्तेमाल कर सरकारी खजाने को भारी चपत लगाई. जांच में सामने आया कि कई जगहों पर बिना काम किए ही करोड़ों के भुगतान उठा लिए गए, जिसकी आंच अब पूर्व ACS सुबोध अग्रवाल जैसे बड़े प्रशासनिक अधिकारियों और रसूखदार ठेकेदारों तक पहुंच गई है. इसी कड़ी में ACB और ED लगातार छापेमारी कर रही हैं.

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