अबतक इंडिया न्यूज 11 जुलाई देशनोक। ऐतिहासिक और धार्मिक नगरी देशनोक की पावन धरा शनिवार को एक बड़े सामाजिक और राजनीतिक आंदोलन की गवाह बनी। यूजीसी रोलबैक (UGC Rollback) की मांग को लेकर श्री करणी राजपूत सेना और राष्ट्रीय हिन्दू महासभा के संयुक्त तत्वावधान में “स्वर्ण न्याय यात्रा” का भव्य आगाज किया गया। करणी धाम देशनोक से शुरू हुई यह पदयात्रा सूबे की राजधानी जयपुर तक करीब 600 किलोमीटर का सफर तय करेगी। इस महा-आंदोलन के जरिए सामाजिक संगठनों ने सरकार के खिलाफ आर-पार की लड़ाई का बिगुल फूंक दिया है।
दिग्गज नेताओं के नेतृत्व में उमड़े हजारों कार्यकर्ता
इस ऐतिहासिक पदयात्रा की कमान श्री करणी राजपूत सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना और राष्ट्रीय हिन्दू महासभा के विजय कौशिक सहित राजपूत व ब्राह्मण समाज के कई दिग्गज नेताओं ने संभाली है। देशनोक में आयोजित जनसभा में हजारों की संख्या में विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारी, युवा और कार्यकर्ता एकजुट हुए। मां करणी के दर पर धोक लगाकर और शंखनाद के साथ इस 600 किलोमीटर लंबी पदयात्रा की शुरुआत की गई। जैसे ही यात्रा आगे बढ़ी, देशनोक की सड़कें भगवा झंडों, बैनरों और गगनभेदी नारों से गूंज उठीं।इस यात्रा का पहला पड़ाव पलाना में होगा।रविवार को सुबह पदयात्रा बीकानेर के लिए प्रस्थान करेगी जहां बीकानेर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा जायेगा।

‘वोट की चोट’ से सरकार को चेताया
आंदोलनकारियों का गुस्सा यूजीसी के फैसलों को लेकर चरम पर है। पदयात्रा में शामिल करणी सेना के सुरजपाल सिंह अम्मू हरियाणा,पूर्व सांसद व सामाजिक नेता आनंद मोहन सिंह बिहार , किसान नेता ठाकुर पुरण सिंह यूपी, ग्वालियर से एडवोकेट अनिल मिश्रा, राजेंद्र सिंह नरुका , भाजपा नेता भगवान सिंह मेड़तिया,करणी सेना के करण प्रताप सिंह सिसोदिया ,सहित युवाओं और नेताओं ने दो टूक शब्दों में सरकार को चेतावनी दी है कि यदि युवाओं के हितों को ध्यान में रखते हुए यूजीसी रोलबैक नहीं किया गया, तो आगामी चुनावों में सरकार को इसका खामियाजा भुगतना पड़ेगा। कार्यकर्ताओं के हाथों में तख्तियां थीं, जिन पर साफ लिखा था— “यूजीसी रोलबैक नहीं, तो वोट नहीं।”
युवाओं के भविष्य और अधिकारों की लड़ाई: मकराना
यात्रा के आगाज के दौरान मीडिया से बातचीत करते हुए करणी राजपूत सेना के प्रमुख महिपाल सिंह मकराना ने कहा, “यह केवल एक यात्रा नहीं, बल्कि युवाओं के अधिकारों की रक्षा के लिए एक महा-यज्ञ है। सरकार को हमारी ताकत और जायज मांगों को समझना होगा। जयपुर पहुंचने तक यह आंदोलन पूरे प्रदेश में फैल जाएगा। यूजीसी रोलबैक की मांग नहीं मानने तक पदयात्रा जारी रहेगी।”
वहीं विजय कौशिक ने कहा कि राजपूत और ब्राह्मण समाज एकजुट होकर इस अन्याय के खिलाफ खड़ा है और जब तक मांग पूरी नहीं होती, यह कदम पीछे नहीं हटेंगे। यूजीसी काला कानून नहीं हटाने तक की समय अवधि में जो भी पंचायत,निकाय चुनाव से लेकर कोई भी अन्य चुनाव होगा उसमें सत्ता पक्ष के खिलाफ वोट करेंगे।
आयोजकों का आरोप है कि UGC (विश्वविद्यालय अनुदान आयोग) के नए कानून सामान्य वर्ग के छात्रों और समाज के हितों के खिलाफ हैं।
इसे शिक्षा के मंदिरों (कॉलेजों) में सामान्य वर्ग के बच्चों के समानता के अधिकार को छीनने वाला कानून बताया गया है।आरोप है कि इस कानून के तहत किसी भी वर्ग के छात्र की झूठी शिकायत पर भी सामान्य वर्ग के मेधावी (टॉपर) छात्रों का करियर खराब किया जा सकता है। नए नियमों के अनुसार हर कॉलेज और यूनिवर्सिटी में एक कमेटी बनेगी, जिसमें ST, SC, OBC व महिला और दिव्यांग के लिए तो प्रतिनिधि होगा, लेकिन सामान्य वर्ग के छात्रों की परेशानी सुनने वाला कोई नहीं होगा।UGC बिल को बिना किसी शर्त के तत्काल वापस लिया जाए।

सवर्ण सांसद व विधायकों की सदन में चुप्पी पर दिखा आक्रोश
यूजीसी रोलबैक की मांग पूरे सवर्ण समाज की हैं।मंच से करणी सेना के सुरजपाल सिंह ने कहा कि हमने जिन सवर्ण नेताओ को चुनकर सदन में भेजा वो अगर सवर्ण समाज के हितों पर अगर चुप रहेंगे तो देशभर से चूड़ियों की भेंट भेजी जायेगी। बिहार के पूर्व सांसद आनंद मोहन ने जोशीले अंदाज कहा कि सवर्ण समाज के हित में कोई कुर्बानी देनी पड़ेगी तो पीछे नहीं हटेंगे।
क्यों सुलग रहा है आक्रोश? सामाजिक संगठनों का आरोप है कि यूजीसी की वर्तमान नीतियां और हालिया फैसले युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ हैं। इस व्यवस्था में बदलाव और रोलबैक की मांग को लेकर लंबे समय से असंतोष था, जो अब देशनोक से सड़क पर महा-आंदोलन के रूप में फूट पड़ा है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से ठीक पहले देशनोक से शुरू हुआ यह 600 किलोमीटर का सफर जयपुर पहुंचते-पहुंचते सरकार के लिए बड़ी सियासी मुसीबत खड़ी कर सकता है। फिलहाल, देशनोक से रवाना हुआ यह जनसैलाब अपने पहले पड़ाव की ओर बढ़ रहा है और रास्ते में जगह-जगह इसका स्वागत किया जा रहा है।












