अबतक इंडिया न्यूज 6 जुलाई जयपुर। राजस्थान सरकार राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रही है। सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति समान नागरिक संहिता का मसौदा (ड्राफ्ट) तैयार कर रही है। इसके लिए विभिन्न वर्गों, सामाजिक संगठनों और विशेषज्ञों से सुझाव भी लिए जा रहे हैं। हालांकि, अभी तक यह कानून लागू नहीं हुआ है और पूरा मामला प्रारंभिक ड्राफ्ट एवं विचार-विमर्श के चरण में है।
इन मुद्दों पर सुझाव लेगी सरकार
संयुक्त शासन सचिव अंजली राजोरिया ने बताया कि समिति विवाह, विवाह विच्छेद (तलाक), भरण-पोषण, उत्तराधिकार, लिव-इन रिलेशनशिप और दत्तक ग्रहण जैसे विषयों पर सुझाव ले रही है.
जयपुर में जनसुनवाई रिटायर्ड आईएएस शत्रुघ्न सिंह की अध्यक्षता में गठित समिति करेगी. कलेक्ट्रेट में 10 जुलाई को सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक सुझाव लिए जाएंगे. इसके बाद दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक आम नागरिकों के लिए जनसुनवाई होगी, जिसमें कोई भी व्यक्ति समिति के समक्ष अपने सुझाव प्रस्तुत कर सकेगा. 11 जुलाई को सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक आम नागरिकों की जनसुनवाई होगी. इस दौरान RUCC-2026 समिति की सदस्य डॉ. शुचि चौहान नागरिकों से सुझाव लेंगी.
प्रस्तावित ड्राफ्ट के अनुसार राज्य में लिव-इन रिलेशनशिप के अनिवार्य पंजीकरण, उत्तराधिकार कानून में समानता, विवाह एवं तलाक के एक समान नियम, गोद लेने की प्रक्रिया, भरण-पोषण संबंधी प्रावधान और बहुविवाह पर रोक जैसे महत्वपूर्ण विषयों को शामिल किया जा सकता है।
लिव-इन रिलेशनशिप पर क्या हो सकता है बदलाव?
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत लिव-इन रिलेशनशिप में रहने वाले जोड़ों के लिए रजिस्ट्रेशन अनिवार्य किया जा सकता है। सरकार का उद्देश्य ऐसे संबंधों में महिलाओं और बच्चों के अधिकारों को कानूनी संरक्षण देना बताया जा रहा है।
उत्तराधिकार कानून में समान नियम
ड्राफ्ट में बेटा और बेटी को पैतृक संपत्ति में समान अधिकार देने तथा अलग-अलग व्यक्तिगत कानूनों की जगह सभी नागरिकों के लिए समान उत्तराधिकार व्यवस्था लागू करने पर विचार किया जा रहा है।
विवाह और तलाक के लिए एक समान कानून
UCC लागू होने पर सभी धर्मों के नागरिकों के लिए विवाह का अनिवार्य पंजीकरण और तलाक की समान प्रक्रिया लागू किए जाने का प्रस्ताव है। इसके अलावा बहुविवाह पर रोक का प्रावधान भी शामिल किए जाने की संभावना है।
गोद लेना और भरण-पोषण
सरकार गोद लेने तथा पति-पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण से जुड़े कानूनों को भी समान बनाने की दिशा में विचार कर रही है, ताकि सभी नागरिकों पर एक समान नियम लागू हो सकें।
अभी कानून लागू नहीं हुआ
महत्वपूर्ण बात यह है कि राजस्थान में UCC अभी लागू नहीं हुआ है। फिलहाल समिति ड्राफ्ट तैयार कर रही है और विभिन्न पक्षों से सुझाव लिए जा रहे हैं। इसके बाद सरकार विधेयक विधानसभा में पेश करेगी। विधानसभा से पारित होने और अधिसूचना जारी होने के बाद ही यह कानून प्रभावी होगा।
(नोट: यह खबर वर्तमान में उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और प्रस्तावित ड्राफ्ट से संबंधित रिपोर्टों पर आधारित है। अंतिम प्रावधान विधेयक पारित होने के बाद ही स्पष्ट होंगे।)











