अबतक इंडिया न्यूज 6 जुलाई । अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे में कथित गड़बड़ी की जांच के बीच सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की अहम बैठक होने जा रही है. इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर फैसला लिया जाएगा. यही वजह है कि हर किसी की नजर इस बैठक और इसके नतीजों पर टिकी है. इस पूरे घटनाक्रम के बीच लोगों के मन में कई सवाल हैं. आखिर राम मंदिर ट्रस्ट में कुल कितने सदस्य हैं? इनमें कितनों को मतदान का अधिकार प्राप्त है? चंपत राय के इस्तीफे पर अंतिम फैसला कौन करेगा? आइए इन सभी सवालों को क्रमवार समझते हैं.
ट्रस्ट में कुल कितने सदस्य हैं?
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कुल 15 सदस्य हैं. इनमें 11 नियमित सदस्य हैं, जबकि 4 पदेन सदस्य हैं. ट्रस्ट के नियमित सदस्य ही संगठन के स्थायी सदस्य माने जाते हैं और महत्वपूर्ण प्रशासनिक निर्णयों में उनकी अहम भूमिका होती है.
सोमवार को होने वाली बैठक में सभी 11 नियमित सदस्यों और पदेन सदस्यों को शामिल होने के लिए कहा गया है. ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने सभी सदस्यों से बैठक में मौजूद रहने का आग्रह किया है. इस बीच इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक वरिष्ठ ट्रस्टी के. पारासरन स्वास्थ्य कारणों से अयोध्या नहीं पहुंच पाएंगे और उनके वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठक में शामिल होने की संभावना है.
किन सदस्यों के पास वोट का अधिकार?
ट्रस्ट के सभी 15 सदस्य मतदान नहीं कर सकते. मतदान का अधिकार केवल 11 नियमित सदस्यों के पास है. यानी चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे को स्वीकार करना है या नहीं, इस पर अंतिम फैसला इन्हीं 11 सदस्यों के बहुमत से होगा. पदेन सदस्य बैठक में अपनी राय रख सकते हैं, लेकिन मतदान की प्रक्रिया में उनकी भूमिका नियमित सदस्यों जैसी नहीं मानी जाती. यही कारण है कि आज की बैठक में बहुमत का गणित सबसे अहम रहेगा.
चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे पर क्या होगा?
सूत्रों के मुताबिक ट्रस्ट के भीतर इस मुद्दे पर एकमत राय नहीं है. एक पक्ष का मानना है कि चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए जाने चाहिए ताकि जांच निष्पक्ष तरीके से आगे बढ़ सके. वहीं दूसरा पक्ष चाहता है कि पहले विशेष जांच दल (SIT) जांच पूरी करे. हालांकि एसआईटी ने सरकार को अपनी रिपोर्ट सौंप दी है. कुछ सदस्य चाहते हैं कि मौजूदा प्रशासनिक व्यवस्था को किसी वरिष्ठ अधिकारी के हाथ में रखा जाए, जबकि कुछ लोग मंदिर प्रबंधन के लिए नई प्रशासनिक व्यवस्था बनाने की वकालत कर रहे हैं.
बैठक कहां होगी?
पहले यह बैठक ट्रस्ट अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के आश्रम मणिराम छावनी में प्रस्तावित थी. लेकिन अब संभावना है कि बैठक सीधे राम मंदिर परिसर में आयोजित की जाए. बैठक का एजेंडा केवल इस्तीफों तक सीमित नहीं रहेगा. मंदिर के दैनिक प्रशासन, जांच के दौरान व्यवस्था और आगे की कार्य योजना पर भी चर्चा होने की उम्मीद है.
आरएसएस की खास नजर?
इस पूरे घटनाक्रम पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ भी करीबी नजर बनाए हुए है. सूत्रों के अनुसार संघ ने अपने वरिष्ठ पदाधिकारी सुरेश भैय्याजी जोशी को अयोध्या भेजा है. वे विश्व हिंदू परिषद से जुड़े मामलों की जिम्मेदारी भी देखते हैं और बैठक के दौरान पूरे घटनाक्रम पर नजर रखेंगे. बताया जा रहा है कि इस सप्ताह कर्नाटक के बेलगावी में शुरू होने वाली संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रांत प्रचारक बैठक में भी राम मंदिर का यह मुद्दा प्रमुख एजेंडा बन सकता है.
आज की बैठक से क्या निकल सकता है?
सोमवार की बैठक से तीन संभावनाएं निकल सकती हैं.
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पहली, बहुमत के आधार पर चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे स्वीकार कर लिए जाएं.
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दूसरी, एसआईटी की आधिकारिक रिपोर्ट का इंतजार किया जाए और तब तक किसी अंतरिम व्यवस्था के जरिए मंदिर का प्रशासन चलाया जाए.
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तीसरी, ट्रस्ट मंदिर के प्रबंधन के लिए नई प्रशासनिक व्यवस्था पर सहमति बनाए.
हालांकि अंतिम फैसला 11 मतदान अधिकार रखने वाले नियमित सदस्यों के बहुमत पर निर्भर करेगा. यानी आज की बैठक केवल दो इस्तीफों पर फैसला नहीं करेगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि जांच पूरी होने तक राम मंदिर का प्रशासन किस तरह चलेगा.











