Home » क्राइम » राजस्थान की इन दो गौशाला में करोड़ों का फर्जीवाड़ा! मृत गोवंश और फर्जी टैग पर उठा अनुदान,अब रिकवरी की तैयारी

राजस्थान की इन दो गौशाला में करोड़ों का फर्जीवाड़ा! मृत गोवंश और फर्जी टैग पर उठा अनुदान,अब रिकवरी की तैयारी

अबतक इंडिया न्यूज 24 जनवरी जयपुर । राजस्थान के जैसलमेर जिले की गौशालाओं में फर्जीवाड़े के बाद अब जयपुर में भी 2 गौशालाओं में अधिक अनुदान दिए जाने का मामला सामने आया है. गोपालन निदेशालय ने इस मामले में दोनों गौशालाओं से बची हुई राशि रिकवरी करने को लेकर पत्र लिखा है. इस मामले में पशुपालन विभाग की जिला स्तरीय कमेटी को दोषी माना जा रहा है.

आपको बता दें कि राजधानी जयपुर की दो बड़ी गौशालाओं में राज्य सरकार द्वारा दिए जाने वाले अनुदान में वित्तीय अनियमितता सामने आई है. गोपालन निदेशालय ने कहा है कि दोनों गौशालाओं में टैग का दुरुपयोग किया गया. कई मृत गोवंश का सालों तक अनुदान उठाया जाता रहा. मामला जयपुर की हिंगोनिया और पिंजरापोल गौशाला से जुड़ा हुआ है.

गौ पुनर्वास केन्द्र, हिंगोनिया को 1 करोड़ 41 लाख रुपए का अधिक अनुदान जारी कर दिया गया. जबकि श्री पिंजरापोल गौशाला, सांगानेर को 2 करोड़ 21 लाख रुपए का अधिक अनुदान दिया गया. इन दोनों गौशालाओं को अधिक भुगतान का खुलासा कार्यालय महालेखाकार लेखा परीक्षा संख्या 11 की ऑडिट में हुआ था

महालेखाकार कार्यालय ने गोपालन निदेशालय को इन दोनों गौशालाओं से अधिक भुगतान किए गए अनुदान की राशि वसूली के लिए लिखा है. इसकी अनुपालना में गोपालन निदेशालय ने पशुपालन विभाग के जयपुर संयुक्त निदेशक को पत्र लिखा है, क्योंकि गौशालाओं को अनुदान पशुपालन विभाग की जिला स्तरीय कमेटी की अनुशंसा पर ही दिया जाता है.

 

गोपालन निदेशालय ने पशुपालन विभाग के संयुक्त निदेशक से दोनों गौशालाओं को दिए गए अधिक अनुदान की राशि रिकवरी के संबंध में लिखा है. हिंगोनिया गौशाला में 1.41 करोड़ अधिक राशि का भुगतान किया गया. वर्ष 2022-23 और 2023-24 में गौशाला को भुगतान में गड़बड़ी हुई. दोनों वित्त वर्ष में हिंगोनिया गौशाला को 31.38 करोड़ अनुदान दिया जाना चाहिए था. इसके बजाय 32.79 करोड़ रुपए का भुगतान कर दिया गया.

 

आवेदित गोवंश की संख्या और संधारित गोवंश की संख्या में अंतर पाया गया. अनुदान 120 से 150 दिन की अवधि के लिए दिया गया. जबकि इस पूरी अवधि में कुछ गोवंश जीवित नहीं थे. जिला स्तरीय कमेटी ने वास्तविक गोवंश का सत्यापन किए बिना भुगतान किया. इस तरह 1.41 करोड़ की राशि का अनियमित रूप से भुगतान किया गया.

पशुधन एप पर पंजीयन नहीं था, फिर भी उठाया भुगतान

इसी तरह सांगानेर स्थित पिंजरापोल गौशाला में भी अधिक भुगतान किए जाने का मामला सामने आया है. पिंजरापोल गौशाला में गायों के टैग रिपीट करने और मृत गोवंश का भी अनुदान उठाए जाने की बात कही गई है. कुछ ऐसे टैग को भी गणना में शामिल कर लिया गया, जो कि भारत पशुधन ऐप पर पंजीकृत नहीं थे. इनका भी अनुदान उठा लिया गया.

पिंजरापोल गौशाला में ऐसे हुई गड़बड़ी

पिंजरापोल गौशाला में वर्ष 2021-22 से लेकर 2024-25 की अवधि में गड़बड़ी हुई. 54 बड़ी गायों और 39 छोटी गायों यानी 93 गोवंश के टैग का रिपीटेशन किया गया. 1307 मृत गोवंश के टैग लगाए गए, इनका भी भुगतान उठाया गया.

4858 टैग भारत पशुधन ऐप पर पंजीकृत नहीं थे, फिर भी अनुदान लिया गया. सवाल यह है कि ऐप पर अपंजीकृत गोवंश का कमेटी ने सत्यापन कैसे किया. मृत गोवंश या टैग रिपीट वाली गायों के सत्यापन की प्रक्रिया पर भी सवाल उठा है, यहां 2.21 करोड़ रुपए की अधिक सहायता अनियमित रूप से दी गई.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *