अबतक इंडिया न्यूज 22 नवंबर । राज्य सरकार ने दिव्यांग बालिकाओं के लिए चल रही पुरानी योजनाओं को मिलाकर नई **चारूचंद्र बोस आर्थिक सबलता पुरस्कार योजना** की शुरुआत कर दी है. इस नई व्यवस्था के तहत सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली दृष्टिहीन, मूक-बधिर और शारीरिक अक्षमता से प्रभावित बालिकाओं को अब पहले की तरह ही आर्थिक सहायता मिलती रहेगी. योजना का उद्देश्य उन बच्चों को शिक्षा और जीवन में आगे बढ़ने के लिए मजबूत आधार देना है, जिन्हें इसकी सबसे ज्यादा जरूरत होती है.
सरकार ने स्पष्ट किया है कि योजना का नाम भले बदल दिया गया हो, लेकिन इसमें मिलने वाली राशि में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है. कक्षा 1 से 8 तक की दिव्यांग छात्राओं को दो हजार रुपए और कक्षा 9 से 12वीं तक की छात्राओं को पांच हजार रुपए मिलेंगे. राशि की निरंतरता बनाए रखने का मकसद यह है कि कोई भी विद्यार्थी योजना में परिवर्तन के कारण परेशान न हो.
राजस्थान सरकार ने दिव्यांग, दृष्टिहीन और मूक-बधिर बालिकाओं के लिए चारूचंद्र बोस आर्थिक सबलता पुरस्कार योजना शुरू की है. कक्षा 1–8 को 2,000 रुपए और 9–12 को 5,000 रुपए मिलेंगे. स्कूलों को 25 नवंबर तक सूची शाला दर्पण पर अपलोड करनी होगी. योजना राशि डीबीटी से मिलेगी.
नई योजना के लिए आवेदन प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है. बालिका शिक्षा फाउंडेशन की ओर से जारी निर्देशों के अनुसार, स्कूलों को अपने यहां अध्ययनरत पात्र बालिकाओं की पूरी जानकारी 25 नवंबर तक शाला दर्पण पोर्टल पर डालनी होगी. इसके बाद जिला शिक्षा अधिकारी इन आवेदनों का सत्यापन 30 नवंबर तक पूरा करेंगे. यदि तय समय पर सत्यापन न हो पाए, तो आवेदन को स्वतः सत्यापित मान लिया जाएगा.
योजना का लाभ सीधे छात्राओं के बैंक खातों में भेजा जाएगा. इस प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए ‘जन आधार’ को अनिवार्य कर दिया गया है. फाउंडेशन ने सभी स्कूलों के प्रधानों को निर्देश दिए हैं कि पात्र छात्राओं का जन आधार पोर्टल पर सही तरीके से प्रमाणित होना चाहिए, ताकि डीबीटी के माध्यम से राशि बिना किसी अड़चन के पहुंचे.
इस योजना का उद्देश्य सिर्फ सहायता राशि देना नहीं, बल्कि दिव्यांग बालिकाओं को शिक्षा से जोड़कर उनकी राह आसान बनाना है. सरकार का मानना है कि आर्थिक सहयोग मिलने से बालिकाएँ स्कूल में टिके रहने और आगे बढ़ने के लिए ज्यादा प्रेरित होंगी. कई परिवारों के लिए यह राशि पढ़ाई जारी रखने में बड़ी मदद साबित होती है.
कुल मिलाकर, नई योजना दिव्यांग छात्राओं के लिए मजबूत सहारा बनने जा रही है. सरकार की मंशा है कि किसी भी बच्ची की शिक्षा आर्थिक वजहों से अधूरी न रह जाए. समय पर आवेदन और सत्यापन होने पर हजारों बालिकाओं को इस वर्ष भी उसी तरह लाभ मिलेगा, जैसा अब तक मिलता आया है.











