अबतक इंडिया न्यूज पटना 14 नवंबर । 243 की विधानसभा में 200 सीटें! बिहार में NDA ऐसा छप्परफाड़ जीतेगा किसी ने सोचा न था. रुझान अगर नतीजों में बदलते हैं तो NDA को 2010 के बाद इतनी बड़ी जीत मिल रही है. ऐसी सूनामी चली है कि महागठबंधन का सूपड़ा साफ हो गया है. आखिर ऐसा हुआ क्या? जानिए इन सीटों का पूरा निचोड़…
- वोट शेयर भी छप्परफाड़: बिहार के चुनावी इतिहास में NDA के लिए ऐसी खुशखबरी दूसरी बार आई है. 2010 में 206 के बंपर बहुमत के बाद NDA ने 2025 में कुछ वैसी ही करिश्मा कर दिखाया है. नीतीश-BJP की जोड़ी ने डबल सेंचुरी मारी है. दो बजे तक स्कोर 201 है. चुनाव आयोग की साइट पर BJP महागठबंधन में 91 सीटों के साथ सबसे बड़ा दल है. उसका वोटर शेयर बढ़कर 21.05% हो गया है. 2020 में BJP के पास 19.5% वोट शेयर के साथ 74 सीटें थीं. JDU दूसरी सबसे बड़ी पार्टी है. उसका वोट शेयर 2020 के 15.4% से बढ़कर 18.98% हो गया है. यानी दोनों का जनाधार बढ़ा है. सबसे चौंकाने बात यह है कि महागठबंधन में 27 सीटों पर सिमट रही तेजस्वी की RJD के वोटों में बहुत ज्यादा कमी नहीं आई है, लेकिन सीटों में उसे BJP और JDU जैसा छप्परफाड़ फायदा नहीं हुआ है. RJD का वोट शेयर 22.86% है. 2020 में में RJD का वोट शेयर 23.1% था. हालांकि RJD के बढ़े सीटों का एक फैक्टर यह भी है कि BJP और JDU 101-101 सीटों पर चुनाव लड़ी थी, जबकि महागठबंधन की तरफ से तेजस्वी ने 146 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे.
- सीमांचल, मगध, मिथिलांचल हो या बिहार को कोई भी रीजन, बिहार के सभी 5 अंचलों में एनडीए आगे चल रहा है. एनडीए को सबसे ज्यादा फायदा भोजपुर में होता दिखाई दे रहा है. यहां वह 18 सीटों पर आगे है. उसे 8 सीटों का फायदा है. मगध में वह 16 सीटों पर आगे है. उसे 6 सीटों का फायदा है. बड़ी बात सीमांचल से है. सीमांचल में एनडीए 18 सीटों पर आगे है.
3 महागठबंधन का हाल: कांग्रेस सिर्फ 3 सीटों पर आगे है. वो 60 से ज्यादा सीटों पर चुनाव लड़ रही थी. पिछली बार उसे 19 सीटें मिली थीं. पिछले चुनाव 19 सीटें जीतने वाली लेफ्ट भी सिर्फ 3 सीटों पर आगे है. आरजेडी सिर्फ 36 सीटों पर आगे है. पिछली बार वो सबसे बड़ी पार्टी बनी थी.
4चिराग ने चौंकाया- चिराग पासवान ने सबको चौंकाते हुए 22 सीटों पर बढ़त बना ली है. 29 सीटों पर लड़ रही चिराग की पार्टी 22 सीटों पर आगे है. चिराग ने ज्यादा सीटें पाने के लिए काफी जद्दोजहद दिखाई थी. वहीं पिछली बार बड़ी कामयाबी पाने वाले लेफ्ट पार्टी भी इस बार फुस्स साबित हो रही है.











